मयखाने में

मयखाने में नशे में तुम मस्त और मैं बहका हुआ हूँ साथ कोई नहीं है जो दिखाए राह घर की बार और …

एक

एक सेंकडो हों किताबें धर्म पर, एक हैं वे सार -संक्षेप में सैंकड़ों धर्मो को ज़रूरत एक पूजा केंद्र की रास्ते सारे …

प्यार पानी

प्यार पानी ज़िंदगी सारी नहीं कुछ काम की प्यार पानी ज़िंदगी में पियो छक के दिल से और रूह से ! A …

छोड़ो न

छोड़ो न छोड़ो न मुझे , जाओ छिप दिल में गुप्त चुप से सर चढ़ मंडराओ पगड़ी जैसे आता और जाता मैं …

बसंती बयार

बसंती बयार चमकता माशूक सूरज के जैसे ; प्यार चक्कर लगाता ग्रहों जैसे जब बहे बयार प्यार की बसंती हर गीली शाख …

दरवेश

दरवेश बोला कि दुनिया में कोई दरवेश नहीं है गर हो कोई दरवेश, तो वो दरवेश ‘नहीं है’ Hits: 23

सूफ़ी

सूफ़ी पूछा किसी ने कि कैसा होता है सूफ़ी जिसे रंज आए जब, तो होती है खुशी Hits: 14

पस्ती

पस्ती खुश रह ग़म से कि ग़म फन्दा है दीदार का पस्ती की तरफ़ तरक़्क़ी, ढंग है इस राह का Hits: 12

मुख़ालिफ़

मुख़ालिफ़ खुदा ने रंज व ग़म इस लिए हैं बनाए ताकि ख़िलाफ़ उसके खुशी नज़र आए मुख़ालफ़त से सारी चीज़ें होती हैं …

रहबर

रहबर रहबर का साया खुदा के ज़िक़्र से बेहतर है सैंकड़ों खानों व पकवानों से सबर बेहतर है देखने वाले की आंख …

दिल

दिल कहा पैग़म्बर ने हक़ ने है फ़रमाया न किसी ऊँचे में न नीचे में हूँ समाया अर्श भी नहीं, न ज़मीन …

खुदा

खुदा जो कुछ भी तुम सोचते हो, फ़ना है मानो वो जो तुम्हारी सोच में नहीं, उसे खुदा जानो Hits: 19

जंग और जलाल

जंग और जलाल चूंकि नबियों में वो रसूल रखते थे तलवार उनकी उम्मत में हैं जवांमर्द और जंगवार जंग और जलाल हमारे …

यार

यार यार रास्ते में सहाय और सहारा है ग़ौर से देखो यार रास्ता तुम्हारा है Hits: 14

बुत

बुत तुम्हारी खुदी का बुत, सारे बुतों की है जड़ वो तो बस साँप, इस में अजगर की जकड़ Hits: 8

सूफ़ी

सूफ़ी ऐ दोस्त सूफ़ी का है इस वक़्त में रहना इस तरीक़े की शर्त नहीं कल की बात कहना Hits: 13

रूह के राज़

रूह के राज़ जब देखो कोई अपना खोल दो रूह के राज़ देखो फूल तो गाओ जैसे बुलबुल बाआवाज़ लेकिन जब देखो …

एक

एक वो बेमकान, खुदा का नूर जिसके अन्दर है उसको माज़ी, मुस्तक़्बिल व हाल किधर है ? तेरे रिश्ते से है माज़ी …

मस्जिद

मस्जिद बेवकूफ़ मस्जिद में जाकर तो झुकते हैं मगर दिल वालों पर वो सितम करते हैं वो बस इमारत है असली हक़ीक़त …

हू से हवा में

हू से हवा में शकलें बेशकली से बाहर आईं, गई उसी में क्योंकि ‘सच है हम वापस लौटते उसी में’ तू मर …

रुबाईयां

रुबाईयां 1 वो पल मेरी हस्ती जब बन गया दरया चमक उठ्ठा हर ज़र्रा होके रौशन मेरा बन के शमा जलता हूँ …

पहाड़

पहाड़ पहाड़ की गूंज ख़ुद से आगाह नहीं है पहाड़ की अक़ल को रूह से राह नहीं है बेकान व बेहोश वो …

बिन मेरे

बिन मेरे इक सफर पर मैं रहा, बिन मेरे उस जगह दिल खुल गया, बिन मेरे वो चाँद जो मुझ से छिप …

दर्द

दर्द दर्द पुरानी दवा को नया बना देता है दर्द उदासी की हर शाख़ काट देता है दर्द चीज़ों को नया बनाने …

इश्क़

इश्क़ इश्क़ हरा देता है सब को, मैं हारा हुआ हूं खारे इश्क़ से शक्कर सा मीठा हुआ हूं ऐ तेज़ हवा …

तौबा

तौबा तन मेरा और रग मेरी तुम से भरी हुईं है तौबा को रखने की मुझ में जगह नहीं है तो तय …

तौबा

तौबा जो उमर गुज़र गई, जड़ उसकी है ये दम सींचो तौबा से उसे, गर रही नहीं है नम उस उमर की …

बदशकल

बदशकल बदशकल ने खुद को आईने के सामने किया ग़ुस्से से भर गया और चेहरा पलट लिया बदगुमान ने जब किसी का …

लतीफ़ा

लतीफ़ा लतीफ़ा एक तालीम है, ग़ौर से उस को सुनो मत बनो उसके मोहरे, ज़ाहिरा में मत बुनो संजीदा नहीं कुछ भी, …

नायाब इल्म

नायाब इल्म सोने और रुपये से भर जाय जंगल अगर बिना मर्ज़ी ख़ुदा की ले नहीं सकते कंकर सौ किताबें तुम पढ़ो …

दुश्वार

दुश्वार हज़रते ईसा से पूछा किसी ने जो था हुशियार इस हस्ती में चीज़ कया है सबसे ज़्यादा दुश्वार बोले ईसा सबसे …

मुरली का गीत

मुरली का गीत (मसनवी की पहली किताब की शुरुआत इसी मुरली के गीत से होती है) सुनो ये मुरली कैसी करती है …

जादूगर

जादूगर जादूगर तुम अनोखे हो निराले हो । शिकारी, शिकार को बनाने वाले हो ॥ दो देखने की आदत अपनी बहुत पुरानी …

सुने कौन आलाप मेरे

सुने कौन आलाप मेरे पनाह मेरी यार मेरे, शौक की फटकार मेरे, मालिको मौला भी हो, और हो पहरेदार मेरे । नूह …

गुलाबी गाल तेरे

गुलाबी गाल तेरे गुलाबी गाल तेरे जब देख पाते हैं होके खुशगवार पत्थरों में राह पाते हैं इक बार घूँघट ज़रा फिर …

मूल के मूल में आ

मूल के मूल में आ कब तलक उलटा चलेगा, अब सीधे आ छोड़ कुफ़्र की राह, अब चल दीन की राह इस …

हमारे सुरसाज़

हमारे सुरसाज़ चाहे तोड़ दो हमारे साज़ अय मुल्ला साज़ हमारे पास हजारों और भी हैं इश्क़ के पन्जों में हम गिर …

मैकदे में आज

मैकदे में आज नशे से बैठे हैं रिन्दो जैसे मैकदे में आज ज़हद न करेंगे और न नमाज़ पढ़ेंगे आज क्या बोलूं …

हंगामे रात के

हंगामे रात के हम आ गए चूँकि हंगामे में रात के ले आये क्या-क्या दरया से रात के रात के परदे में …

बिन मेरे

बिन मेरे इक सफर पर मैं रहा, बिन मेरे उस जगह दिल खुल गया, बिन मेरे वो चाँद जो मुझ से छिप …