Rumi Poems In Hindi

Rumi Motivational Quotes in Hindi | रूमी के प्रेरणादायक विचार

Rumi Motivational Quotes in Hindi | रूमी के प्रेरणादायक विचार

∗रूमी के प्रेरणादायक विचार∗ RUMI (1207 – 1273) आप समुद्र में एक बूंद नहीं हैं. आप एक बूंद में पूरे महासागर हैं. — रूमी. Rumi is “Most popular poet” and the “Best selling poet” in the United States   रूमी का जीवन परिचय नाम Rumi / रूमी (Mawlānā Jalāl ad-Dīn Muḥammad Balkhī) जन्म 1207 जन्म स्थान Balkh, Afghanistan. मृत्यु 17 December 1273 (age 65-66) मृत्यु स्थान Konya, Turkey. धर्म Islam व्यवसाय Persian poet, jurist, Islamic scholar, theologian, and Sufi mystic. दृष्टिकोण सूफियाना, His followers formed the Mevlevi Order. उपलब्धियां Rumi has been described as the “most popular poet” and the ... »

मयखाने में

मयखाने में

मयखाने में नशे में तुम मस्त और मैं बहका हुआ हूँ साथ कोई नहीं है जो दिखाए राह घर की बार और बार .. कहा था मैंने पियो थोड़ी एक या दो प्याले जानता हूँ मैं इस शहर में होश में कोई नहीं है हाल एक दूजे से बदतर एक है उन्मत्त और दूसरा पगला चुका है आओ आओ यार मेरे चलते हैं खण्डरों में चखते हैं ज़िंदगी की मिठास दोस्तों की मण्डली में देखोगे यहाँ तुम ज़र्रे ज़र्रे में कोई न कोई नशे में और साकी घूमती रहती मैं गया बाहर मकां से एक शराबी पास आया मेरे कोई इक जिसकी नज़र झरोखा थी सैंकड़ों जन्नत के घरों का झुमता और मस्त चलता इक समुद्री जहाज जिसका लंगर कहीं न होश में थे जो, जलते थे उस से खड़े रहते किनारे हो कहाँ से आप , पूछ... »

एक

एक

एक सेंकडो हों किताबें धर्म पर, एक हैं वे सार -संक्षेप में सैंकड़ों धर्मो को ज़रूरत एक पूजा केंद्र की रास्ते सारे जाते एक ही घर को ज्यूँ हज़ारों दाने मक्के के उगें एक बीज से सेंकडो हज़ारों पके पकवान खाने पीने को ध्यान से देखो अंतिम परिणति तो एक सबकी जब हो तुम तृप्त भोजन एक खा के पचासों नए भोजन लगते उबाऊ ह्रदय को भूख लगती, तो, भाते दोगुने क्योंकि तुमने माना सेंकडो हज़ारों से भी ज्यादा उसे जो कि एक है केवल If there are a hundred religious books, they are but one chapter: a hundred different religions seek one place of worship. All these roads end in one House: all these thousand ears of corn are from ... »

प्यार पानी

प्यार पानी

प्यार पानी ज़िंदगी सारी नहीं कुछ काम की प्यार पानी ज़िंदगी में पियो छक के दिल से और रूह से ! A lifetime without Love is of no account. Love is the Water of Life. Drink it down with heart and soul ! »

छोड़ो न

छोड़ो न

छोड़ो न छोड़ो न मुझे , जाओ छिप दिल में गुप्त चुप से सर चढ़ मंडराओ पगड़ी जैसे आता और जाता मैं मर्ज़ी से अपनी कहते तुम , तेज़ जैसे धड़कने दिल की .. तुम चिड़ा सकते मुझे चाहो जितना पर कभी न छोड़ कर जाना मुझे Do not leave me, hide in my heart like a secret, wind around my head like a turban. “I come and go as I please,” you say, “swift as a heartbeat.”… You can tease me as much as you like but never leave me. »

बसंती बयार

बसंती बयार

बसंती बयार चमकता माशूक सूरज के जैसे ; प्यार चक्कर लगाता ग्रहों जैसे जब बहे बयार प्यार की बसंती हर गीली शाख लगती थिरकने The beloved shines like the sun; the lover whirls like the planets. When love’s spring breeze blows, every moist branch starts dancing »

दरवेश

दरवेश

दरवेश बोला कि दुनिया में कोई दरवेश नहीं है गर हो कोई दरवेश, तो वो दरवेश ‘नहीं है’ »

सूफ़ी

सूफ़ी

सूफ़ी पूछा किसी ने कि कैसा होता है सूफ़ी जिसे रंज आए जब, तो होती है खुशी »

पस्ती

पस्ती

पस्ती खुश रह ग़म से कि ग़म फन्दा है दीदार का पस्ती की तरफ़ तरक़्क़ी, ढंग है इस राह का »

मुख़ालिफ़

मुख़ालिफ़

मुख़ालिफ़ खुदा ने रंज व ग़म इस लिए हैं बनाए ताकि ख़िलाफ़ उसके खुशी नज़र आए मुख़ालफ़त से सारी चीज़ें होती हैं पैदा कोई नहीं मुख़ालिफ़ उसका वो है छिपा »

रहबर

रहबर

रहबर रहबर का साया खुदा के ज़िक़्र से बेहतर है सैंकड़ों खानों व पकवानों से सबर बेहतर है देखने वाले की आंख सौ लाठियों से बेहतर है आंख पहचान लेती क्या मोती क्या पत्थर है »

दिल

दिल

दिल कहा पैग़म्बर ने हक़ ने है फ़रमाया न किसी ऊँचे में न नीचे में हूँ समाया अर्श भी नहीं, न ज़मीन व न आसमान समा सकता है मुझे, प्यारे यकीन जान मोमिन के दिल में समा जाता हूँ, है अजब चाहो तो मेरी उन दिलों में से कर लो तलब »

खुदा

खुदा

खुदा जो कुछ भी तुम सोचते हो, फ़ना है मानो वो जो तुम्हारी सोच में नहीं, उसे खुदा जानो »

जंग और जलाल

जंग और जलाल

जंग और जलाल चूंकि नबियों में वो रसूल रखते थे तलवार उनकी उम्मत में हैं जवांमर्द और जंगवार जंग और जलाल हमारे दीन की निशानी है परबत व गुफ़ा ईसाई दीन में पाई जानी है »

यार

यार

यार यार रास्ते में सहाय और सहारा है ग़ौर से देखो यार रास्ता तुम्हारा है »

बुत

बुत

बुत तुम्हारी खुदी का बुत, सारे बुतों की है जड़ वो तो बस साँप, इस में अजगर की जकड़ »

सूफ़ी

सूफ़ी

सूफ़ी ऐ दोस्त सूफ़ी का है इस वक़्त में रहना इस तरीक़े की शर्त नहीं कल की बात कहना »

रूह के राज़

रूह के राज़

रूह के राज़ जब देखो कोई अपना खोल दो रूह के राज़ देखो फूल तो गाओ जैसे बुलबुल बाआवाज़ लेकिन जब देखो कोई धोखे व मक्कारी भरा लब सी लो और बना लो अपने को बन्द घड़ा वो पानी का दुश्मन है बोलो मत उसके आगे तोड़ देगा वो घड़े को जाहली का पत्थर उठाके »

एक

एक

एक वो बेमकान, खुदा का नूर जिसके अन्दर है उसको माज़ी, मुस्तक़्बिल व हाल किधर है ? तेरे रिश्ते से है माज़ी और मुस्तक़्बिल वो एक चीज़ है दोनों, तू समझता है कि दो (माज़ी=भूत काल, मुस्तक़्बिल=भविष्य, हाल=वर्तमान) »

मस्जिद

मस्जिद

मस्जिद बेवकूफ़ मस्जिद में जाकर तो झुकते हैं मगर दिल वालों पर वो सितम करते हैं वो बस इमारत है असली हक़ीक़त यहीं है सरवरों के दिल के सिवा मस्जिद नहीं है वो मस्जिद जो औलिया के अन्दर में है सभी का सजदागाह है, खुदा उसी में है (सरवर=गुरू,मुर्शिद, औलिया=संत) »

हू से हवा में

हू से हवा में

हू से हवा में शकलें बेशकली से बाहर आईं, गई उसी में क्योंकि ‘सच है हम वापस लौटते उसी में’ तू मर रहा हर दम व वापस हो रहा हर दम कहा मुस्तफ़ा ने बस एक दम का ये आलम हमारी सोच एक तीर है उस हू से हवा में हवा में कब तक रहे ? लौट जाता खुदा में (सच…उसी में=कुरान में, मुस्तफ़ा= मुहम्मद साहब की उपाधि, हू=सूफ़ियों का खुदा को बुलाने का एक नाम) »

रुबाईयां

रुबाईयां

रुबाईयां 1 वो पल मेरी हस्ती जब बन गया दरया चमक उठ्ठा हर ज़र्रा होके रौशन मेरा बन के शमा जलता हूँ रहे इश्क पर मैं बस लम्हा एक बन गया सफ़रे उम्र मेरा 2 हूँ वक्त के पीछे और कोई साथ नहीं और दूर तक कोई किनारा भी नहीं घटा है रात है कश्ती मैं खे रहा पर वो खुदा रहीम बिना फज्ल के नहीं 3 पहले तो हम पे फरमाये हज़ारों करम बाद में दे दिए हज़ारों दर्द ओ ग़म बिसाते इश्क पर घुमाया खूब हमको कर दिया दूर जब खुद को खो चुके हम 4 ऐ दोस्त तेरी दोस्ती में साथ आए हैं हम तेरे कदमों के नीचे बन गए ख़ाक हैं हम मज़्हबे आशिकी में कैसे ये वाजिब है देखें तेरा आलम व तुझे न देख पाएं हम »

पहाड़

पहाड़

पहाड़ पहाड़ की गूंज ख़ुद से आगाह नहीं है पहाड़ की अक़ल को रूह से राह नहीं है बेकान व बेहोश वो बस आवाज़ करता है जब तुम चुप हो गए, वो भी चुप करता है »

बिन मेरे

बिन मेरे

बिन मेरे इक सफर पर मैं रहा, बिन मेरे उस जगह दिल खुल गया, बिन मेरे वो चाँद जो मुझ से छिप गया पूरा रुख़ पर रुख़ रख कर मेरे, बिन मेरे जो ग़मे यार में दे दी जान मैंने हो गया पैदा वो ग़म मेरा, बिन मेरे मस्ती में आया हमेशा बग़ैर मय के खुशहाली में आया हमेशा, बिन मेरे मुझ को मत कर याद हरग़िज याद रखता हूँ मैं खुद को, बिन मेरे मेरे बग़ैर खुश हूँ मैं, कहता हूँ कि अय मैं रहो हमेशा बिन मेरे रास्ते सब थे बन्द मेरे आगे दे दी एक खुली राह बिन मेरे मेरे साथ दिल बन्दा कैक़ूबाद का वो कैक़ूबाद भी है बन्दा बिन मेरे मस्त शम्से तबरीज़ के जाम से हुआ जामे मय उसका रहता नहीँ बिन मेरे »

दर्द

दर्द

दर्द दर्द पुरानी दवा को नया बना देता है दर्द उदासी की हर शाख़ काट देता है दर्द चीज़ों को नया बनाने का कीमिया है मलाल कैसे हो उठ गया दर्द जहाँ है अरे नहीं बेज़ार हो कर मत भर आह सर्द खोज दर्द, खोज दर्द, दर्द, दर्द और दर्द »

इश्क़

इश्क़

इश्क़ इश्क़ हरा देता है सब को, मैं हारा हुआ हूं खारे इश्क़ से शक्कर सा मीठा हुआ हूं ऐ तेज़ हवा ! मैं सूखा पत्ता सामने तेरे हूं जानता नहीं किस तरफ़ जा कर मैं गिरूं »

तौबा

तौबा

तौबा तन मेरा और रग मेरी तुम से भरी हुईं है तौबा को रखने की मुझ में जगह नहीं है तो तय है कि तौबा को दिल से निकाल दूं जन्नत की ज़िन्दगी से भी तौबा कैसे करूं ? »

तौबा

तौबा

तौबा जो उमर गुज़र गई, जड़ उसकी है ये दम सींचो तौबा से उसे, गर रही नहीं है नम उस उमर की जड़ को दो आबे-हयात ज़रा ताकि वो दरख़्त हो जाय फिर से हरा-भरा सब माज़ी तेरा इस पानी से सुधर जाएगा ज़हर पुराना सब इस से शक्कर हो जाएगा (दम=साँस,पल, आबे-हयात=अमृत, माज़ी=भूत-काल) »

बदशकल

बदशकल

बदशकल बदशकल ने खुद को आईने के सामने किया ग़ुस्से से भर गया और चेहरा पलट लिया बदगुमान ने जब किसी का कोई जुर्म देखा दोज़ख़ की आग में वो भीतर से जल उठा अपने ग़ुरूर को दीन की हिमायत बताता है खुदी के कुफ़्र को ख़ुद में देख नहीं पाता है (आईने=शीशे, बदगुमान=जो भ्रम में है) »

लतीफ़ा

लतीफ़ा

लतीफ़ा लतीफ़ा एक तालीम है, ग़ौर से उस को सुनो मत बनो उसके मोहरे, ज़ाहिरा में मत बुनो संजीदा नहीं कुछ भी, लतीफ़ेबाज़ के लिए हर लतीफ़ा सीख है एक, आक़िलों के लिए (तालीम=शिक्षा, ज़ाहिरा=सामने) »

नायाब इल्म

नायाब इल्म

नायाब इल्म सोने और रुपये से भर जाय जंगल अगर बिना मर्ज़ी ख़ुदा की ले नहीं सकते कंकर सौ किताबें तुम पढ़ो अगर कहीं रुके बिना नुक़्ता ना रहे याद खुदा की मर्ज़ी के बिना और गर ख़िदमत करी, न पढ़ी एक किताब गिरेबां के अन्दर से आ जाते इल्म नायाब »

दुश्वार

दुश्वार

दुश्वार हज़रते ईसा से पूछा किसी ने जो था हुशियार इस हस्ती में चीज़ कया है सबसे ज़्यादा दुश्वार बोले ईसा सबसे दुश्वार ग़ुस्सा ख़ुदा का है प्यारे कि जहन्नुम भी लरज़ता है उनके डर के मारे पूछा कि खुदा के इस क़हर से जां कैसे बचायें ? वो बोले अपने ग़ुस्से से इसी दम नजात पायें (दुश्वार=मुश्किल, जहन्नुम=नर्क,दोज़ख़, नजात= छुटकारा) »

मुरली का गीत

मुरली का गीत

मुरली का गीत (मसनवी की पहली किताब की शुरुआत इसी मुरली के गीत से होती है) सुनो ये मुरली कैसी करती है शिकायत । हैं दूर जो पी से, उनकी करती है हिकायत ॥ काट के लाये मुझे, जिस रोज़ वन से । सुन रोए मरदोज़न, मेरे सुर के ग़म से ॥ खोजता हूँ एक सीना फुरक़त से ज़र्द-ज़र्द । कर दूँ बयान उस पर अपनी प्यास का दर्द ॥ कर दिया जिसको वक़्त ने अपनों से दूर । करे दुआ हर दम यही, वापसी होय मन्ज़ूर ॥ मेरी फ़रियाद की तान हर मजलिस में होती है । बदहाली मे होती है और खुशहाली में होती है ॥ बस अपने मन की सुनता समझता हर कोई । क्या है छिपा मेरे दिल मे, जानता नहीं कोई ॥ राज़ मेरा फ़रियादों से मेरी, अलग़ तो नही । ऑंख से, कान से ये खुलता म... »

जादूगर

जादूगर

जादूगर जादूगर तुम अनोखे हो निराले हो । शिकारी, शिकार को बनाने वाले हो ॥ दो देखने की आदत अपनी बहुत पुरानी । जादू चला तुम्हारा हुई आँखें ऐंची तानी ॥ पक गये हो पूरे, शहतूत से हो मीठे । अंगूर क्या अंगूरी, तेरे लिये सब सीठे ॥ मिमियाते थे जो अब तक जम कर गरज रहे हैं । कैसे मोगरे के तन से गुलाब जम रहे हैं ॥ तन के चलने वाले जाते हैं सर झुकाये । खामोश रहने वाले अब हैं आस्मां उठाये ॥ जहालत मे क़ैद थे जो हो गये हैं ग्यानी । संजीदा हो गये हैं जादू से आसमानी ॥ जो तलवार सजाते थे कल जंगे-मैदान में । अब लफ़्ज़ों के वार करते और सिर्फ़ कान में ॥ जादू चला है तेरा चींटी का वक़्त आया । खौफ़ में हैं हाथी जो उनको सदा सताया... »

सुने कौन आलाप मेरे

सुने कौन आलाप मेरे

सुने कौन आलाप मेरे पनाह मेरी यार मेरे, शौक की फटकार मेरे, मालिको मौला भी हो, और हो पहरेदार मेरे । नूह तू ही रूह तू ही, कुरंग तू ही तीर तू ही, आस ओ उम्मीद तू है, ग्यान के दुआर मेरे । नूर तू है सूर तू, दौलते-मन्सूर तू, बाजेकोहेतूर तू, मार दिए ख़राश मेरे । कतरा तू दरिया तू, गुंचा-ओ-खार तू, शहद तू ज़हर तू, दर्द दिए हज़ार मेरे । सूरज का घरबार तू, शुक्र का आगार तू, आस का परसार तू, पार ले चल यार मेरे । रोज़ तू और रोज़ा तू, मँगते की खैरात तू, गागरा तू पानी तू, लब भिगो इस बार मेरे । दाना तू ओ जाल तू, शराब तू ओ जाम तू, अनगढ़ तू तैयार तू, ऐब दे सुधार मेरे । न होते बेखुदी में हम, दिल में दर्द होते कम, राह अपनी ... »

गुलाबी गाल तेरे

गुलाबी गाल तेरे

गुलाबी गाल तेरे गुलाबी गाल तेरे जब देख पाते हैं होके खुशगवार पत्थरों में राह पाते हैं इक बार घूँघट ज़रा फिर से हटा दो दंग होने का दीवानों को मज़ा दो ताकि आलिम समझी-बूझी राह भूलें हुशियारों की अक़ल की हिल जाएँ चूलें पानी बन जाय मोती, तुम्हारा अक्स पड़ना ताकि आतिश छोड़ दे जलना, जंग करना तुम्हारे हुस्न के आगे चाँद से मुँह मोड़ लूँ जन्नत की झिलमिलाती रौशनियां छोड़ दूँ तुम्हारे चेहरे के आगे न बोलूं – आईना है ये बूढ़ा आसमां तो जंग जैसे खा गया है इस जहाँ में सांस तुमने फूँक दी है इस बेचारे को नई एक शकल दी है ऐ उशना साज़ में कुछ तान लाओ पैनी आँखों के लिए कुछ ख़ाहिश जगाओ (कुल्लियाते दीवाने शम्स तबरेज... »

मूल के मूल में आ

मूल के मूल में आ

मूल के मूल में आ कब तलक उलटा चलेगा, अब सीधे आ छोड़ कुफ़्र की राह, अब चल दीन की राह इस डंक में देख दवा, और डंक खा अपनी ख़ाहिश के मूल के मूल में आ हरचंद है तू इस मिट्टी का ही बना सच के मोती के धागों से अन्दर बुना ख़ुदाई नूर का ख़ज़ांची तुझको चुना अपनी ख़ाहिश के मूल के मूल में आ बेखुदी से जब तू खुद को बाँध लेगा तो जान कि खुदी की क़ैद से खुलेगा और हज़ार बन्धन तोड़ तू उड़ चलेगा अपनी ख़ाहिश के मूल के मूल में आ ख़लीफ़ा की पुश्त से तू पैदा हुआ है पसरे इस खोटे जहाँ को देखता है लानत तू इतने पर ही खुश घूमता है अपनी ख़ाहिश के मूल के मूल में आ हरचंद इस जहाँ का तावीज़ है तू अन्दर छिपे ख़ज़ानों की ख़ान है तू झाँक... »

हमारे सुरसाज़

हमारे सुरसाज़

हमारे सुरसाज़ चाहे तोड़ दो हमारे साज़ अय मुल्ला साज़ हमारे पास हजारों और भी हैं इश्क़ के पन्जों में हम गिर गए जो क्या फ़िक्र जो बाजे-बन्सी कम हुए हैं सारे जहाँ के साज़ जो जल भी जाएँ बहुत सुरसाज़ तो भी छिप कर खड़े हैं तरंग और तान उनकी गई आसमां तक मगर उन बहरे कानों में कुछ आता नहीं है दुनिया के चराग़ व शमा सब बुझ भी जाएँ तो ग़म क्या, चकमक जहां में कम नहीं है ये नग़मा तो एक तिनका दरिया के ऊपर गौहर दरिया की सतह पर आता नहीं है पर हुस्न उस तिनके का जानो गौहर से उस चौंध की अक्स की अक्स हम पर गिरी है ये नग़में सारे वस्ल के शौक़ की हैं शाख़ें और मूल और शाख़ कभी बराबर नहीं हैं तो बन्द कर ये मुँह और दर खोल दि... »

मैकदे में आज

मैकदे में आज

मैकदे में आज नशे से बैठे हैं रिन्दो जैसे मैकदे में आज ज़हद न करेंगे और न नमाज़ पढ़ेंगे आज क्या बोलूं क्या महफ़िल क्या मय है आज क्या साक़ी, क्या मेहरबानी, क्या लुत्फ़ आज ना हिज्र का कोई निशान है, ना बू है दिलदार से मेल और विसाल है आज आज मिलते तोहफ़े और चुम्मे साक़ी से प्याले हैं, मस्तियां हैं, और शराबें हैं आज आज मस्ती में जानूँ ना सुबह से शाम गुज़र रहे हैं ज़माने लम्हों की तरह आज जल पड़े हैं आज़ फ़ित्ने में लग कर सभी इस आँगन की मजलिस में हाय व हू है आज ख़ुद से निकल कर पूजते हैं सभी शराब को साक़ी के देखे बिन हम पर होती नहीं करामात शम्सुद्दीन तबरेज़ी ने की न कोई खुराफात तौहीद की मय ढाल सब यारों को... »

हंगामे रात के

हंगामे रात के

हंगामे रात के हम आ गए चूँकि हंगामे में रात के ले आये क्या-क्या दरया से रात के रात के परदे में है वो छिपा हुआ गवाह दिन भला बराबर में है कब रात के सोना चाहेगा नहीं, नींद से करे गुरेज़ जो कि देखे नहीं उसने तमाशे रात के जान बहुत पाक और बस पुरनूर दिल बँधा रहा, लगा रहा, बन्दगी में रात के रात तेरे आगे है जैसे काली पतीली क्योंकि चखे नहीं तूने हलवे रात के लम्बी ये राह है रफ़्तार दे मेरे यार लम्बाइयाँ हैं और चौड़ाइयाँ हैं रात के हाथ मेरे बन्द हैं सब काम-काज से सुबह तलक हाथ मेरे हवाले रात के पेशावरी कारोबार है अगर दिन का लुत्फ़ अलग हैं ब्योपार के रात के मुझे फ़ख़्र अपने शम्सुद्दीन तबरेज़ी पर हसरतें दिन की ... »

बिन मेरे

बिन मेरे

बिन मेरे इक सफर पर मैं रहा, बिन मेरे उस जगह दिल खुल गया, बिन मेरे वो चाँद जो मुझ से छिप गया पूरा रुख़ पर रुख़ रख कर मेरे, बिन मेरे जो ग़मे यार में दे दी जान मैंने हो गया पैदा वो ग़म मेरा, बिन मेरे मस्ती में आया हमेशा बग़ैर मय के खुशहाली में आया हमेशा, बिन मेरे मुझ को मत कर याद हरग़िज याद रखता हूँ मैं खुद को, बिन मेरे मेरे बग़ैर खुश हूँ मैं, कहता हूँ कि अय मैं रहो हमेशा बिन मेरे रास्ते सब थे बन्द मेरे आगे दे दी एक खुली राह बिन मेरे मेरे साथ दिल बन्दा कैक़ूबाद का वो कैक़ूबाद भी है बन्दा बिन मेरे मस्त शम्से तबरीज़ के जाम से हुआ जामे मय उसका रहता नहीँ बिन मेरे »