Rumi Ki Kahaniayn

हकीम और बूढ़ा आदमी

हकीम और बूढ़ा आदमी

हकीम और बूढ़ा आदमी एक बार एक बूढ़ा आदमी एक जवान हकीम के पास गया। उसने कहा ” हकीम साहब, मेरी याददाश्त कमज़ोर हो गयी है!, जिसकी वजह से में बहुत परेशान रहता हूँ। ” हकीम ने कहा ” यह सब बुढ़ापे की वजह से है !” बूढ़ा आदमी बोला “मेरी आँखे भी कमज़ोर हो गयीं हैं।” हकीम ने कहा ” यह भी बुढ़ापे की वजह से है !” बूढ़े व्यक्ति ने कहा ” मेरी कमर में भी बहुत तकलीफ रहती है !” हाकिम बोला ” जनाब, बुढ़ापे की निशानियों में से एक निशानी यह भी है।” बूढ़े व्यक्ति ने फिर कहा ” मेरा हाजमा भी कमज़ोर हो गया है, यहाँ तक की हलकी खुराक भी मुश्किल से हज़म कर पता हूँ।” इस पर हकीम ने कहा ” बुढ़ापे में इंसान की पाचन शक्ति भी कमज़ोर हो जाती है... »

सबसे बड़ा पहलवान

सबसे बड़ा पहलवान

सबसे बड़ा पहलवान ईरान के काज़िम नाम के शहर में एक व्यक्ति रहता था जो की एक माहिर पहलवान था, उसने आस पास की कई कुश्ती की प्रतियोगिताओं (दंगल) में जीत हांसिल की थी. चुकी उसने आस पास के शहरों के लगभग सभी पहलवानो को अखाड़े में मात दे रखी थी, इसलिए वो अपने आपको सबसे बड़ा पहलवान और ताकतवर समझने लगा था। इसी वजह से उसमे घमंड और गुरुर बहुत आ गया था। एक दिन उसने हम्माम में एक पुराने ज़माने के पहलवान की तस्वीर देखी, जो उस दौर के पहलवानों के लिए आदर्श था। इस तस्वीर में, पहलवान के बाज़ुओं पर शैर गुदा हुआ था, जो की साहस और ताकत का प्रतीक था। यह देखकर इस जवान पहलवान के मन में यह बात आई की अब जबकि में सभी पहलवानों ... »

शिकारी और परिंदे की तीन नसीहतें

शिकारी और परिंदे की तीन नसीहतें

शिकारी और परिंदे की तीन नसीहतें एक दिन जंगल में एक शिकारी ने एक जाल बिछाया, एक परिंदा जो वहां से गुज़र रहा था, दाने के लालच में आकर उस जाल में फस गया। यह देखकर शिकारी बहुत खुश हुआ, उसने परिंदे को जाल से निकाल कर, अपने चाकू से जैसे ही उसे मारना चाहा, परिंदे ने कहा ” ए शिकारी, में बहुत ही छोटा और कमज़ोर हूँ, तुम तो मुर्गे और बकरे जैसे बड़े जानवर का गोश्त खा कर भी संतुष्ट नहीं हुए तो मेरे गोश्त से तुम्हारी भूख क्या मिटेगी ? अगर तुम मुझे छोड़ दो तो में तुम्हे तीन बडे काम की बातें सिखाऊंगा, जिससे तुम्हारी ज़िन्दगी बदल जाएगी।” शिकारी ने कुछ देर सोचा की अगर में इस परिंदे को छोड़ दूँ तो मुझे क्या मिलेगा? कु... »

मेढक और चूहा – दोस्ती

मेढक और चूहा – दोस्ती

मेढक और चूहा – दोस्ती एक दिन एक चूहा एक नदी के किनारे खेल कूद में मशगूल था की उसने तभी एक मेढक को देखा! दोनों एक दूसरे को देख कर हेरत में पड़ गए, चूहा जो की सुखी ज़मीन पर रहने का आदि था, पानी के अंदर रहने वाले जीवों के बारे में जानने को बहुत उत्सुक था।, दूसरी डरफ मेढक भी यह जानना चाहता था की जंगल में रहने वाले इस जानवर की ज़िन्दगी कैसी होती है। दोनों ने तय किया की क्यों न हर दिन,कम से कम एक घंटा,नदी के किनारे बैठकर एक दूसरे की ज़िन्दगी के हालात मालूम करें। और इस तरह दोनों हर रोज़ एक घंटा नदी के किनारे मिलने लगे और अपनी अपनी कहानी सुनने सुनाने लगे, और यह मुलाकातें एक गहरी दोस्ती में बदल गयी। (Hindi ... »