चमने-ख़ार-ख़ार है दुनिया

चमने-ख़ार-ख़ार है दुनिया  चमने-ख़ार-ख़ार है दुनिया ख़ूने-सद नौबहार है दुनिया जान लेती है जुस्तजू  इसकी दौलते-ज़ेरे-मार है दुनिया ज़िन्दगी नाम रख दिया किसने मौत …

मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ू-मंदी

मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ू-मंदी  मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ू-मंदी मक़ाम-ए-बंदगी दे कर न लूँ शान-ए-ख़ुदावंदी तेरे आज़ाद बंदों की न ये दुनिया न वो दुनिया …

है कलेजा फ़िग़ार होने को

है कलेजा फ़िग़ार होने को है कलेजा फ़िगार होने को दामने-लालाज़ार होने को इश्क़ वो चीज़ है कि जिसमें क़रार चाहिए बेक़रार …

तराना-ए-हिन्दी (सारे

तराना-ए-हिन्दी (सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा) उर्दू में लिखी गई देशभक्ति रचनाओं में शायद सबसे अधिक प्रसिद्ध यह रचना अल्लामा इक़बाल …

लेकिन मुझे पैदा किया उस

लेकिन मुझे पैदा किया उस देस में तूने इक वलवला-ए-ताज़ा दिया मैंने दिलों को लाहौर से ता-ख़ाके-बुख़ारा-ओ-समरक़ंद लेकिन मुझे पैदा किया उस …

नसीहत

नसीहत बच्चा-ए-शाहीं से कहता था उक़ाबे-साल -ख़ुर्द ऐ तिरे शहपर पे आसाँ रिफ़अते- चर्ख़े-बरीं है शबाबअपने लहू की आग मे‍ जलने का …

हर मुक़ाम से आगे मुक़ाम

हर मुक़ाम से आगे मुक़ाम है तेरा ख़िर्द के पास ख़बर के सिवा कुछ और नहीं तेरा इलाज नज़र के सिवा कुछ …

जब इश्क़ सताता है आदाबे-ख़ुदागाही

जब इश्क़ सताता है आदाबे-ख़ुदागाही  जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही खुलते हैं ग़ुलामों पर असरार-ए-शहंशाही ‘अत्तार’ हो ‘रूमी’ हो ‘राज़ी’ हो ‘ग़ज़ाली’ …

मुझे आहो-फ़ुगाने-नीमशब का

मुझे आहो-फ़ुगाने-नीमशब का  मुझे आह-ओ-फ़ुग़ान-ए-नीम-शब का फिर पयाम आया थम ऐ रह-रौ के शायद फिर कोई मुश्किल मक़ाम आया ज़रा तक़दीर की …

ख़ुदा के बन्दे तो हैं

ख़ुदा के बन्दे तो हैं हज़ारों बनो‌ में फिरते हैं मारे-मारे ज़माना आया है बेहिजाबी का, आम दीदार-ए-यार होगा सुकूत था परदादार …

नहीं मिन्नत-कश-ए-ताब-ए-शनीदन दास्ताँ मेरी

नहीं मिन्नत-कश-ए-ताब-ए-शनीदन दास्ताँ मेरी  नहीं मिन्नत-कश-ए-ताब-ए-शनीदन दास्ताँ मेरी ख़ामोशी गुफ़्तगू है, बेज़ुबानी है ज़बाँ मेरी ये दस्तूर-ए-ज़बाँ-बंदी है कैसी तेरी महफ़िल में …

हिमाला

हिमाला ऐ हिमाला ऐ फ़सीले किश्वरे-हिन्दोस्ताँ चूमता है तेरी पेशानी को झुककर आसमाँ तुझमें कुछ पैदा नहीं देरीना-रोज़ी के निशाँ तू जवाँ …

जमहूरियत

जमहूरियत  जमहूरियत इस राज़को इक मर्दे-फ़िरंगी ने किया फ़ाश हरचंद कि दानाइसे खोला नही‍ करते जमहूरियतइक तर्ज़े-हुकूमतहै कि जिसमें बन्दों को गिना करते …

परवाना और जुगनू

परवाना और जुगनू  परवाना परवाने की मंज़िल से बहुत दूर है जुगनू क्यों आतिशे-बेसूद से मग़रूर है जुगनू जुगनू अल्लाह का सो शुक्र कि …

अक़्ल ने एक दिन ये दिल

अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहा अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहा भूले-भटके की रहनुमा हूँ मैं दिल …

ज़मीं-ओ-आसमाँ मुमकिन है

ज़मीं-ओ-आसमाँ मुमकिन है  मुमकिन है के तु जिसको समझता है बहाराँ औरों की निगाहों में वो मौसम हो ख़िज़ाँ का है सिल-सिला …

मेरा वतन वही है

मेरा वतन वही है  चिश्ती ने जिस ज़मीं पे पैग़ामे हक़ सुनाया, नानक ने जिस चमन में बदहत का गीत गाया, तातारियों …

तू अभी रहगुज़र में है

तू अभी रहगुज़र में है  तू अभी रहगुज़र में है क़ैद-ए-मकाम से गुज़र मिस्र-ओ-हिजाज़ से गुज़र, पारेस-ओ-शाम से गुज़र जिस का अमाल …

सख़्तियाँ करता हूँ दिल

सख़्तियाँ करता हूँ दिल पर ग़ैर से ग़ाफ़िल हूँ मैं सख़्तियाँ करता हूँ दिल पर ग़ैर से ग़ाफ़िल हूँ मैं हाय क्या …

ख़ुदा का फ़रमान

ख़ुदा का फ़रमान  उट्ठो मेरी दुनिया के ग़रीबों को जगा दो ख़ाक-ए-उमरा के दर-ओ-दीवार हिला दो गर्माओ ग़ुलामों का लहू सोज़-ए-यक़ीं से …

परीशाँ हो के मेरी ख़ाक

परीशाँ हो के मेरी ख़ाक आख़िर दिल न बन जाए परीशाँ होके मेरी खाक आखिर दिल न बन जाये जो मुश्किल अब …

अगर कज-रौ हैं अंजुम

अगर कज-रौ हैं अंजुम आसमाँ तेरा है या मेरा अगर कज-रौ हैं अंजुम आसमाँ तेरा है या मेरा मुझे फ़िक्र-ए-जहाँ क्यूँ हो …

जवाब-ए-शिकवा

जवाब-ए-शिकवा दिल से जो बात निकलती है असर रखती है । पर नहीं, ताकत-ए-परवाज़ मगर रखती है । क़दसी अलासल है, रफ़ात …

मेरी नवा-ए-शौक़ से शोर हरीम-ए-ज़ात में

मेरी नवा-ए-शौक़ से शोर हरीम-ए-ज़ात में  मेरी नवा-ए-शौक़ से शोर हरीम-ए-ज़ात में ग़ुलग़ुला-हा-ए-अल-अमाँ बुत-कदा-ए-सिफ़ात में हूर ओ फ़रिश्ता हैं असीर मेरे तख़य्युलात …

असर करे न करे सुन तो ले

असर करे न करे सुन तो ले मेरी फ़रियाद असर करे न करे सुन तो ले मेरी फ़रियाद नहीं है दाद का …

आम मशरिक़ के मुसलमानों

आम मशरिक़ के मुसलमानों का दिल मगरिब में जा अटका है आम मशरिक़ के मुसलमानों का दिल मगरिब में जा अटका है …

साक़ी

साक़ी  नशा पिला के गिराना तो सबको आता है, मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी। जो बादाकश थे …

ख़ुदी में डूबने वालों

ख़ुदी में डूबने वालों   जहाने-ताज़ा की अफ़कारे-ताज़ा से है नमूद कि संगो-ख़िश्त से होते नहीं जहाँ पैदा ख़ुदी में डूबने वालों …

फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर

फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर  फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर तस्ख़ीर-ए-मक़ाम-ए-रंग-ओ-बू कर तू अपनी ख़ुदी को खो चुका है खोई …

जिस खेत से दहक़ाँ को

जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी उट्ठो मेरी दुनिया के ग़रीबों को जगा दो ख़ाक-ए-उमरा के दर-ओ-दीवार हिला दो गरमाओ …

ये पयाम दे गई है मुझे

ये पयाम दे गई है मुझे  ये पयाम दे गई है मुझे बादे- सुबहशाही कि ख़ुदी के आरिफ़ों का है मक़ाम पादशाही …

फिर चराग़े-लाला से रौशन

फिर चराग़े-लाला से रौशन हुए कोहो-दमन फिर चराग़े-लाला से रौशन हुए कोहो-दमन मुझको फिर नग़्मों पे उकसाने लगा मुर्ग़े-चमन फूल हैं सहरा …

जिन्हें मैं ढूँढता था आसमानों में ज़मीनों में

जिन्हें मैं ढूँढता था आसमानों में ज़मीनों में  जिन्हें मैं ढूँढता था आस्मानों में ज़मीनों में वो निकले मेरे ज़ुल्मतख़ाना-ए-दिल के मकीनोंमें अगर …

उक़ाबी शान से झपटे थे जो

उक़ाबी शान से झपटे थे जो बे-बालो-पर निकले उक़ाबीशान से झपटे थे जो बे-बालो-परनिकले सितारे शाम को ख़ूने-फ़लक़में डूबकर निकले हुए मदफ़ूने-दरियाज़ेरे-दरियातैरने …

बच्चों की दुआ

बच्चों की दुआ  लब पे’ आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी, ज़िन्दगी शमा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी । दूर दुनिया …