बदशकल

बदशकल

बदशकल ने खुद को आईने के सामने किया
ग़ुस्से से भर गया और चेहरा पलट लिया

बदगुमान ने जब किसी का कोई जुर्म देखा
दोज़ख़ की आग में वो भीतर से जल उठा

अपने ग़ुरूर को दीन की हिमायत बताता है
खुदी के कुफ़्र को ख़ुद में देख नहीं पाता है
(आईने=शीशे, बदगुमान=जो भ्रम में है)

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