इश्क़

इश्क़

इश्क़ हरा देता है सब को, मैं हारा हुआ हूं
खारे इश्क़ से शक्कर सा मीठा हुआ हूं

ऐ तेज़ हवा ! मैं सूखा पत्ता सामने तेरे हूं
जानता नहीं किस तरफ़ जा कर मैं गिरूं

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